Tuesday, November 2, 2021

तुम बिन जीवन ऐसे खाली

तुम बिन जीवन ऐसे खाली
जैसे पटाखो बिन दिवाली
बिन बाजे की बारात
बिन प्रीतम के सूनी रात
लड़ाई जैसे बिना गाली
तुम बिन जीवन ऐसे खाली
            छत तो है पर बिना सीढ़ी
            बिन माचिस के जैसे बीड़ी
            दारू जैसे बिना चखना
            महफ़िल में न कोई अपना
            बिना गिलास के जैसे थाली
            तुम बिन जीवन ऐसे खाली
ब्लाउज बिन जैसे साड़ी
बिना तेल हो जैसे गाड़ी
बिन असलेह के कोई जवान
बिना छत का हो कोई मकान
घर जैसे बिना घरवाली
तुम बिन जीवन ऐसे खाली

No comments:

Post a Comment