Monday, January 31, 2011

वो पल

तुम आये
आकर चले गये
आखिरी बन गयी
पहली ही मुलाकात
कुछ कहा भी नही तुमने
और न सुना
जो मैने कहा था


उन कुछ पलो मे
सिमट कर रह गया हूँ मै
और मेरी जिन्दगी  भी
उन पलो मे
देखा है मैने
फूल को मुस्काते हुए
तारीफ सुनकर शर्माते हुए
फिर किसी डर से घबराते हुए
मन को आकाश मे घूमते
सपनो को बनते और
टूट जाते हुए


उन पलो से सीखा है मैने
सही अर्थ प्रेम का
परिभाषा जीवन की
और मजबूरिया इंसान की
जो रोकती है हमे
वो करने से जो हम चाहते है
उसे अपनाने से
जिसे हम चाहते है

वो पल
भूलाये नही भूलते
एक पल को भी नही हटता
वो दृश्य आँखो से
वो पहली मुलाकात
जो आखिरी बन गयी

31 comments:

  1. 'वह पहली मुलाकात

    जो आखिरी बन गई '

    सुन्दर भावों की रचना

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  2. सुन्दर भावों की शानदार प्रस्तुति...

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  3. ऐसे दो-चार सुन्दर पल ही सुखद यादगार बन जाते हैं !

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  4. सार्थक कथन संदेश नब गया…

    उन पलो से सीखा है मैने
    सही अर्थ प्रेम का
    परिभाषा जीवन की
    और मजबूरिया इंसान की

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  5. "वक्त सारी जिन्दगी में दो ही गुजरे हैं कठिन,
    इक तेरे आने से पहले, इक तेरे जाने के बाद।"

    उन पलों की याद हमेशा जिन्दा रहेगी और सुवासित करेगी जीवन को। गुड लक, दीपक।

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  6. यही तो दो पल हैं यादगार, जीवन के! हर किसी के जीवन में आते हैं यह पल, कोई नहीं अछूता इससे!!

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  7. दो-चार सुन्दर पल ही सुखद यादगार बन जाते हैं|

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  8. यही तो वो पल होते है तो जिंदगी की सबसे अनमोल दौलत बन जाते है। जो हमेशा हमारे पास रहते है।

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  9. बिना कुछ कहे जो संवाद होते हैं उनका आनंद ही कुछ और होता है....

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  10. अक्सर वो सारी पहली मुलाकाते हसीन लगती है जो आखरी भी होती है शायद इसीलिए अच्छी होती है की वो आखरी है ?

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  11. अच्छे लोग सुख के एक पल में पूरी ज़िन्दगी जी लेते हैं और बुरे लोग ख़ुशी का एक पल पूरी ज़िन्दगी तलाशते रहते हैं. मेरा तो यही मानना है.

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  12. बहुत खूब, अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकर.
    कवितायेँ भावपूर्ण हैं आपकी.

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  13. मित्र ,आपने दिल से लिखा है.मन को छू गयी आप की रचना .
    सलाम

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  14. @ सुरेन्द्र सिंह “झंझट“ जी
    धन्यवाद

    @ सुशील बाकलीवाल जी
    धन्यवाद

    @ झील (डा0 दिव्या) जी
    आप ठीक कहती है
    @ सुज्ञ जी
    धन्यवाद

    @ मो सम कौन ?
    भाई साहब उन पलो की याद ही जीवन मे रोमांच भर देती है
    याद भी आपने दिलायी है। हा हा हा हा

    @ पटाली दा विलेज जी
    आप का कहना सही है जी

    @ एहसास (अमित भाई )
    और ये दौलत कभी खत्म नही होती

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  15. @ राजेश कुमार “नचिकेता “ जी
    आनंद ही आनंद है

    @ अंशुमाला जी
    आप से इस बात मे सहमत नही हू

    @ शिव कुमार (शिवा) जी
    आपका स्वागत है आते रहीयेगा

    @ कुवँर कुसुमेश जी
    आप का मानना एकदम सही है जी

    @ सोमेश सक्सेना जी
    मेरे ब्लाग पर आपका स्वागत है फालो करने के लिए आभारी हूँ

    @ सेगेबोब जी
    धन्यवाद

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  16. देखा है मैने
    फूल को मुस्काते हुए
    तारीफ सुनकर शर्माते हुए
    फिर किसी डर से घबराते हुए
    मन को आकाश मे घूमते
    सपनो को बनते और
    टूट जाते हुए

    deepak ji bahut gehri anubhuti.badhai sweekar karen......
    blog pe akr utsah verdhan k liye bahut bahut shukriya

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  17. कभी कभी एक लम्हा ही जीवन बन जाता है ... उस एक पल का तो सबको इंतेज़ार रहता है ...
    अच्छा लिखा है ...

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  18. सहज, सटीक एवं प्रभावशाली लेखन के लिए बधाई!
    कृपया इसे भी पढ़िए......
    ==============================
    शहरीपन ज्यों-ज्यों बढ़ा, हुआ वनों का अंत।
    गमलों में बैठा मिला, सिकुड़ा हुआ बसंत॥
    सद्भावी - डॉ० डंडा लखनवी

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  19. बहुत मार्मिक भावों से भरी कविता.
    'हैं सबसे मधुर वो गीत जिन्हें
    हम दर्द के सुर में गाते हैं'
    आपने भी उसी सुर में गाया है.

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  20. लम्हा लम्हा तरसे थे हम जिस लम्हे के लिए
    वो लम्हा आया भी तो एक लम्हे के लिए...
    आपकी यह रचना पढ़ कर मुझे यही शेर याद आ गया...
    बहुत सुन्दर रचना...

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  21. नमस्कार दीपक जी
    सुन्दर भावों की रचना
    बहुत अच्छा लिखा हे दीपक जी

    ॐ कश्यप में ब्लॉग में नया हूँ
    कर्प्या आप मेरा मार्ग दर्शन करे
    धन्यवाद
    http://unluckyblackstar.blogspot.com/

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  22. यही तो वो पल होते है तो जिंदगी की सबसे अनमोल दौलत बन जाते है

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  23. दीपक भाई जितनी सुंदर रचनाये लिखते है उतने ही अच्छे इंसान भी है दीपक भाई बहुत ही प्रसंता हुई आपसे मिलकर

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  24. @ अमरेन्द्र अमर जी

    @ पारूल जी

    @ दिगम्बर नासवा जी

    @ डॉ0 डंडा लखनवी जी

    @ भूषण जी

    @ पूजा जी
    बहुत बहुत धन्यवाद

    @ ओम कश्यप

    @ संजय भास्कर
    आपका बहुत धन्यवाद के आप मुझ से मिलने आये
    बहुत बहुत धन्यवाद

    @ गोपाल मिश्रा जी
    बहुत बहुत धन्यवाद

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  25. deepak ji bahoot khoob likhte ho
    eske liye badhai....

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  26. बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

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  27. ऐसे ही कुछ पल जीने का सहारा बन जाते हैं...बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति..

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  28. प्रभावशाली लेखन ...बहुत सुन्दर .अच्छा लगा....

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