Friday, November 4, 2016

हमें प्यार हो गया

इतनी महँगाई, और हमें प्यार हो गया
दिल का गुलशन गुलजार हो गया 
दिल और आँखों के तो आ गए मजे
जेब का लेकिन बंटा धार हो गया
हम सुबह से भूखे प्यासे लगे रहे जुगाड़ में
शाम को पिज्जा हट में उनका शनिवार हो गया
मिस काल मारकर चलाते रहे अपना काम
उन्होंने किया फोन,  और उनका  रिचार्ज को गया
अपनी बाइक आधे दाम में बेच दी ?
जन्मदिन था उनका, मजबुरी देना उपहार हो गया
मिलने का वादा, और अपनी जेब खाली
बहुत अच्छा हुआ, जो उनकी मम्मी को बुखार हो गया

Tuesday, July 29, 2014

सहारनपुर

प्रिय मित्रो, प्रणाम
आज बहुत दिनों के बाद कोई कविता बनी है कविता क्या दिल का दर्द बाहर आया है


फीकी हो गयी मिठास शीर की 
चटपटी न लगी आज  फुलकियां 
हर निवाले के संग आँखों में 
आती, जलती दुकानो की झलकियाँ 

शर्मसार है आज  इंसानियत यहाँ 
क्या झांकते हो खोलके खिड़कियां  ?

सलामत दोस्त को घर पहुचाना कसूर था 
बड़ी बहादुरी दिखाई चला के उसपे गोलियाँ 

एक मुद्दत लगी थी उसको रोजी चलाने  में 
पल में जलवा  दिया  पाने को सियासी सुर्खियाँ 

क्या हिन्दू क्या मुसलमां सब एक से है 
तुम सबको प्यारी है तो सिर्फ अपनी कुर्सियाँ 



Friday, May 4, 2012

मैल

पैसा तो  हाथ  का मैल  है  (पुरानी कहावत ) 

बड़े वी आई पी मैल  हो ?
दिखाई  ही  नहीं देते,
किस  हाथ  पर  कितने चढ़े हो 
पता भी नहीं लग पाता 

जो दिन रात पसीना बहाता है 
दो रोटी के चक्कर में 
नहा भी नहीं पाता है 
हाथ धोना तो दूर 
मुंह भी बस इक बार धुल पाता है 
उसके साथ क्या  पंगा है तुम्हारा ?
क्या चिढ है उसके हाथ से  
जो तुम दूर भागते हो 

वे जो महंगे हैंड वाश लगाते है 
बीस बार हाथ धोते है 
दो बार नहाते है 
मेहनत से वास्ता नहीं 
बस हराम की खाते है 
घोटाला करके 
सबके हिस्से का मैल 
अपनी मुठ्ठी में दबा जाते है 
उनसे तो गहरी दोस्ती है तुम्हारी ?

सच बताओ तुम मैल ही हो ?
या हमारे बुढ्ढे हमें पागल बना गए ?

Sunday, March 25, 2012

आप और हम

एक ही प्रभू की पूजा हम अगर करते नहीं
एक ही दरगाह पर सर आप भी रखते नहीं
           अपना सजदागाह  अगर देवी का स्थान  है
           आपके सजदो का मरकज भी तो कब्रिस्तान है
हम अपने देवताओ की गिनती अगर रखते नहीं
आप भी मुश्किल कुशाओ को तो गिन सकते नहीं
           जितने कंकर उतने शंकर ये अगर मशहूर है
           जितने मुर्दे उतने सजदे आपका  भी दस्तूर है
अपने देवी देवताओ को अगर है अख्त्यार
आपके वलियो की ताकत का नहीं कुछ शुमार
            वक्ते मुश्किल अपना नारा है "जय बजरंग बली "
           आपको देखा लगाते नारा "या हैदर अली"
लेता है अवतार प्रभू अपना जो इस  देश में
आपने समझा खुदा को मुस्तुफा के भेष में
            जिस तरह हम है बजाते मंदिरों में घंटियाँ
            तुर्बतों पर आपके देखा बजाते तालियाँ
हम भजन करते है गाकर देवताओ की खूबियाँ
कब्र पर गाते हो तुम भी झूम कर कव्वालियां
          हम चढाते है बुतों पर दूध या पानी की धार
          आपको देखा चढाते मुर्ग, चादर और हार
बुत की पूजा हम करे हम को मिले नारे सकर
तुम झुको कब्रों पर और तुमको मिले जन्नत में घर ?
          आप मुशरिक हम भी  मुशरिक मामला जब साफ़ है
          "जन्नती तुम " "दोजखी हम " ये कोई इंसाफ है ?
हम भी जन्नत में रहेंगे तुम अगर हो जन्नती
वर्ना दोजख में हमारे साथ होंगे आप भी 

( ये कविता मेरे दोस्त ने मुझे दी है ब्लॉग पर पोस्ट करने के लिए  )