Sunday, October 14, 2018

मुक्तक

छूटेगा साथ तेरा तो बिखर ही जाऊंगा
दूर रह के तुझसे ना जीवन बिताऊँगा
तुझ से बिछड़ के गर मैं मर ही गया तो
भूत बनके रोज तेरी खटिया हिलाऊंगा

जब भी देंगे इम्तिहान, करेंगे पर्चा अपना अपना
तभी तो होगा, जब भी होगा चर्चा अपना अपना
तुम मेरे और मै तुम्हारा तो दिल से है मेरे यार
दोस्ती अपनी पक्की  मगर खर्चा अपना अपना

वो मेरी जान हमेशा मुझसे हंस के बोलती है
बहुत प्यार करती है, और हर राज खोलती है
जीवन के झपेटो ने व्यापारी बना दिया उसे
अब प्यार के तोहफे भी वो पैसों में तोलती है

Thursday, September 13, 2018

बहुत पास आकर अब दूर जा रहे हो

बहुत पास आकर अब दूर जा रहे हो
सजा मुझको देते हो या खुद पा रहे हो
     मोहब्बत के सारे कसमे वादे
     भूलने लगे क्यो सारे इरादे
     मुझे देख जीना मुझे देख मरना
     चाहत में ऐसा भी था काम करना
     खफा क्यो मुझसे कुछ तो बताओ
     में बुलाता इधर हूँ तुम उधर जा रहे हो
बहुत पास आकर अब दूर जा रहे हो
सजा मुझको देते हो या खुद पा रहे हो
    यूँ मुझसे नजरें चुराओगे कब तक
    प्यार अपने दिल मे दबाओगे कब तक
    माना के किस्मत से बहुत से गिले है
    मिलकर के बिछड़े और अब फिर मिले है
    चाहत थी चाहतो का घर है बनाना
    अब बन रहा है तो क्यो दीवारे ढा रहे हो
बहुत पास आकर अब दूर जा रहे हो
सजा मुझको देते हो या खुद पा रहे हो

Monday, August 27, 2018

कितने दुख सहे तुमने

कितने दुख सहे तुमने, सहे कितने अत्याचार,
तन की पीड़ा, मन की पीड़ा, मिले आंसू अपार,
कमजोर था,  साथ तुमको लेकर चल नही पाया,
अपने मन की देवी बिठा दी, किसी दूजे के द्वार,
         की होती हिम्मत थोड़ी , जीवन का अलग रंग होता,
         मुस्कुराती जिंदगी और खुशियों का भी ढंग होता,
         ना मजबूर तुम होती, और न तेरे फैसले गलत होते,
         जीवन के  कठिन दौर में यदि उस दिन तेरे संग होता
हम राह ना बनाया किस्मत ने, पर साथ तो चलता
दूर से ही सही लेकिन कुछ बात तो करता
कुछ तो हौसला मिलता किसी के साथ होने का,
उस मुश्किल घड़ी में शायद तेरा फैसला बदलता
           कोई हक नही अब तुझपे इल्जाम लगाने का
            तेरे जीवन पर किसी को उंगली उठाने का
            अनगिन संघर्षो से भरे तेरे जीवन कोे सलाम
            जो प्यार में लुटा, और गम न किया लुट जाने का

Tuesday, July 24, 2018

तुम ही बताओ मुझको प्यार क्या है

तुम ही बताओ मुझको प्यार क्या है
         यूँ ही रात भर जागने क्या मतलब
         तकिये भिगोने का आधार क्या है
तुम ही बताओ मुझको प्यार क्या है
        एक तेरे ही बिना जी ना लगे
        साथ हो सारा संसार क्या है
तुम ही बताओ मुझको प्यार क्या है
        अंखिया तो तेरे दर्शन की प्यासी
        सामने मोहक चेहरों का अंबार क्या है
तुम ही बताओ मुझको प्यार क्या है
      तेरे प्रेंम में भीगना चाहे ये मन
      फिर सावन की ठंडी फुहार क्या है
तुम ही बताओ मुझको प्यार क्या है
      जिससे बंधे हुए है आज तक
      उस रिश्ते का प्रकार क्या है
तुम ही बताओ मुझको प्यार क्या है
      माना अब नही बात पहले सी
      मन मे फिर भी ये गुबार क्या है
तुम ही बताओ मुझको प्यार क्या है
    डर तुमको अब लोक लाज का
     मेरा कहो अब अधिकार क्या है
तुम ही बताओ मुझको प्यार क्या है