Monday, October 5, 2020

रत्ती रत्ती तोल बिका हूँ

रत्ती रत्ती तोल बिका हूँ
मैं अनमोल, बे मोल बिका हूँ
मेरे हाल को वो ही न समझे
जिनके लिए दिल खोल बिका हूँ

उनके प्रेम की कीमत भारी
देते देते जिंदगी गुजारी
ब्याज में सारी खुशियां दे दी
फिर भी बाकी रही उधारी
वो क्या जाने उनकी खातिर
मैं कोड़ियों के मोल बिका हूँ

प्यार ने अजब खेल दिखाये
मेरे ही न हुये मेरे हमसाये
और किसी को कहना क्या अब
जब अपने ही हो गए पराये
समझ न आये और लिखूँ क्या
मन के सब पन्ने खोल लिखा हूँ

Monday, September 28, 2020

तू धुन तो बन कर देख

तू धुन तो बन कर देख, तेरा गीत मैं बन जाऊंगा
तू प्रीत तो बढा मुझसे, तेरा मीत मै बन जाऊंगा
            तुम दरिया बन कर आओगी, प्यास बन जाऊंगा मैं
           अमिट प्रेम के प्रथम मिलन की, आस बन जाऊंगा मैं
             तू मन से तो निभा कर देख, तेरी प्रीत  बन जाऊँगा मैं
             तू बाँसुरी तो देख बन कर, तेरा संगीत मै बन जाऊँगा
तू प्रीत तो बढा मुझसे, तेरा मीत मै बन जाऊंगा
 तू धुन तो बन कर देख, तेरा गीत मैं बन जाऊंगा  
            तुम यदि सुबह बनोगी, सूरज बन जाऊंगा मैं
            पत्थर तुम बनना चाहो तो, मूरत बन जाऊँगा मैं
            तुम यदि चाहोगी मुझसे, तेरी जीत बन जाऊंगा मैं
            तू प्रेम में तो देख तप कर, शीत मैं बन जाऊंगा
तू प्रीत तो बढा मुझसे, तेरा मीत मै बन जाऊंगा
 तू धुन तो बन कर देख, तेरा गीत मैं बन जाऊंगा  

Thursday, September 24, 2020

बनकर मस्त मलंगा

रे मन उसके लिए न सोच
कर ली जिसने तुझसे ओट
कर दे तू भी उसपे चोट                 
बनकर मस्त मलंगा
       मिट्टी बातो पे उसकी डाल
       खुश रह के दिखा कमाल
       गली में उसकी मचा धमाल
       बनकर मस्त मलंगा
 थी बस उसके मन मे खोट
  तू क्यों दिल पे लेता चोट
  उड़ाना उसकी शादी में नोट
  बनकर मस्त मलंगा
‌     उसको करने दे मनमानी
            दुनिया है ये आनी जानी
            खत्म कर दे अब ये कहानी
            बनकर मस्त मलंगा
अपने मन से करले बात
अब भड़के ना तेरे जज्बात
कर जीवन की नई शुरूआत
बनकर मस्त मलंगा
         


Thursday, September 17, 2020

मेरा तुम्हारा बस प्यार ही तो है

मेरा तुम्हारा बस प्यार ही तो है
गहरे रिस्तो का संसार ही तो है
मिल जाये सब कुछ और तू न मिले
मेरे लिए सब बेकार ही तो है
अब भी मेरे सर चढ़ के बोलता है
तेरी आशिकी का खुमार ही तो है
कोई दिल मे उतरा कोई दिल से उतरा
अपना अपना व्यवहार ही तो है
छोटे का दुलार न बड़े का आदर
बस  पढ़ा लिखा गवार ही तो है
कोशिश कर किनारा भी मिलेगा
तू अभी बीच मंझधार ही तो है
पढ़ ले आज ही कल हो जाएगा कूड़ा
जीवन भी एक अखबार ही तो है
कभी ख़ुशी मिली कभी गम मिला
सब समय का व्यापार ही तो है
बैठ कर बात तो कर हर मसले का हल है
गैर नही है, परिवार ही तो है
मेरे खाने को जो बनाता है लजीज
तेरे हाथो का बना अचार ही तो है