Wednesday, November 22, 2017

मैं तुम्हे छोड़ दू तुम मुझे छोड़ दो

भूल जाओ सारे वादे सारी कसमे तोड़ दो
जिंदगी की सवारी को अब नया  मोड़ दो
अब यही बेहतर है हम दोनों के लिए
मैं तुम्हे छोड़ दू तुम मुझे छोड़ दो
बर्बाद करो मुझे या आबाद कर दो
अपनी यादो से अब आज़ाद कर दो
थमती नहीं ये आंसुओ की झड़ी है
तू मूरत बनी अब भी आंखों में पड़ी है
आंसुओ से बनी अब ये माला तोड़ दो
मैं तुम्हे छोड़ दू तुम मुझे छोड़ दो
दिल पे पत्थर रख मुझको सताती क्यों है
मेरी भावना अपनी भावनाओ को दबाती क्यों है
यूं तो जिंदगी प्यार में फूलो सी खिलती है
जुदाई की सजा मुझे ही हर बार मिलती है
अब प्यार का, वादों का, हर सम्बन्ध तोड़ दो
मैं तुम्हे छोड़ दू तुम मुझे छोड़ दो

4 comments:

  1. बहुत ही खुबसूरत और भावपूर्ण अभिवयक्ति.....

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  2. दिल पे पत्थर रख मुझको सताती क्यों है
    मेरी भावना अपनी भावनाओ को दबाती क्यों है
    .............बहुत अच्छी लगी यह पंक्तियाँ।

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    1. धन्यवाद भाई जी

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