Tuesday, March 22, 2011

बात आयी तेरी

बातो ही बातो में जब बात आयी तेरी
यादों से तेरी महकी यार तन्हाई मेरी
                 रंज नहीं दिल में तू पास नहीं मेरे
                 लगने लगी है प्यारी अब जुदाई तेरी
बड़े प्यारे लगते हो  मिलते हो ख्वाबो में
नींद से हो गयी जैसे कुडमाई  मेरी
                 बेशक हो दूर मुझसे पर दूर नहीं लगते
                 मेरे दिल में देती है धड़कन सुनायी तेरी
नाप ली दुनिया ने गहराई  समुन्दर की
देखेगी क्या वो चाहत की गहराई मेरी
                तरसता है क्यों "दीपक"  ज्योति के लिए
                कब तक रहेगी दूर वो है परछाई  मेरी



36 comments:

  1. नींद से हो गयी जैसे गुड़माई मेरी
    ये " गुडमाई" या "कुडमाई" ( सगाई )
    इस लाइन ने कुछ याद दिला दिया एक मित्र परीक्षाओ के दिनों में ये लाइने कहा करती थी |

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  2. अंशुमाला जी धन्यवाद
    गलती सुधार ली गयी है
    आभार

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  3. @लगने लगी है प्यारी अब जुदाई तेरी

    kya baat hai saini sahib, pyaar ka ye aalam hai ki ab judaai bhi pyaari lagne lagi hai....

    tere rang mein rangi main..... dowo ek rang hoye.

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  4. 'नाप ली दुनिया ने गहराई समुन्दर की

    देखेगी क्या वो चाहत की गहराई मेरी '

    वाह ! गज़ब का शेर .....

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  5. तरसता है क्यों "दीपक" ज्योति के लिए

    दीपक का
    प्रकाश के लिए तरसना ही
    ग़ज़ल है...

    दिलचस्प रचना .

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  6. बेशक हो दूर मुझसे पर दूर नहीं लगते
    मेरे दिल में देती है धड़कन सुनायी तेरी...bhut hi acchi kavita hai...

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  7. कब तक रहेगी दूर वो है परछाईं मेरी ।
    दीपक संग ज्योति का शानदार मेल दिखाती प्रस्तुति...

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  8. वाह!! विरह में भी आनंदानुभव!!
    और आशा का दीपक भी……… परछाई की चाह में………

    शानदार
    तरसता है क्यों "दीपक" ज्योति के लिए
    कब तक रहेगी दूर वो है परछाई मेरी

    यह 'ज्योति' कौन है?;)

    : अस्थिर आस्थाओं के ठग

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  9. नाप ली दुनिया ने गहराई समुन्दर की
    देखेगी क्या वो चाहत की गहराई मेरी
    कम से कम कोशिश करे वह, अच्छी सोच, बधाई....

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  10. क्या बात है दीपक जी. अपनी बात खूबसूरती से लिख दी आपने.

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  11. बहुत खूब दीपक जी.

    बड़े प्यारे लगते हो मिलते हो ख्वाबो में
    नींद से हो गयी जैसे कुडमाई मेरी

    नयापन लिए हुए है यह शेर.

    तरसता है क्यों "दीपक" ज्योति के लिए
    कब तक रहेगी दूर वो है परछाई मेरी

    गुदगुदा गया दीपक का ज्योति के लिए तरसना.
    सुन्दर ग़ज़ल.
    सलाम.

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  12. सच कहा आपने।

    होली के पर्व की अशेष मंगल कामनाएं।
    जानिए धर्म की क्रान्तिकारी व्याख्या।

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  13. बहुत गजब की अभिब्यक्ति| धन्यवाद|

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  14. नाप ली दुनिया ने गहराई समुन्दर की
    देखेगी क्या वो चाहत की गहराई मेरी
    तरसता है क्यों "दीपक" ज्योति के लिए
    कब तक रहेगी दूर वो है परछाई मेरी
    बहुत खूब

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  15. बेशक हो दूर मुझसे पर दूर नहीं लगते
    मेरे दिल में देती है धड़कन सुनायी तेरी
    yaad is ahsaas ko jagaaye rahti hai ,laazwaab .

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  16. नाप ली दुनिया ने गहराई समुन्दर की
    देखेगी क्या वो चाहत की गहराई मेरी

    क्या बात है.वाह वाह.

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  17. अरे वाह दीपक जी.. आपने तो रोमांटिसिज़्म की नयी परिभाषा ही गढ़ दी.. बहुत ख़ूबसूरत!!

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  18. नाप ली दुनिया ने गहराई समुन्दर की
    देखेगी क्या वो चाहत की गहराई मेरी ...

    waah waah waah

    Awesome !

    .

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  19. deepak joognu chand sitare ek se hai
    yani sare ishq ke mare ek se hai
    deepak ji bahut badhiya likh

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  20. किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

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  21. बहुत खूब!
    तरसता है क्यों "दीपक" ज्योति के लिए ...
    क्योंकि चिराग तले अन्धेरा ...

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  22. वाह... बहुत खूब...
    किस पंक्ति को, किस शब्द को सबसे बेहतर कहूँ... पता नहीं... सब एक से बढ़कर एक...

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  23. वाह जी बहुत सुंदर कविता, धन्यवाद

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  24. @ अंशुमाला जी
    @ दीपक बाबा जी
    @ सुरेन्द्र सिंह “झंझट“ जी
    @ दानिश जी
    @ आहुति जी
    @ सुशील बाकलीवाल जी
    ब्लाग पर आकर मेरा उत्साह बढाने के लिए सादर धन्यवाद

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  25. @ सुज्ञ जी
    @ सुनील कुमार जी
    @ भूषण जी
    @ समीर लाल जी
    @ विशाल जी
    @ रजनीश जी
    ब्लाग पर आकर मेरा उत्साह बढाने के लिए सादर धन्यवाद

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  26. @ पटाली जी
    @ यश चंचल जी
    @ ज्योति जी
    @ कुवँर कुसुमेश जी
    @ सम्वेदना के स्वर जी
    @ डा0 दिव्या जी
    ब्लाग पर आकर मेरा उत्साह बढाने के लिए सादर धन्यवाद

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  27. @ अरीबा जी
    @ संजय भास्कर जी
    @ स्मार्ट इंडियन जी
    @ पूजा जी
    @ राज भाटिया जी
    @ काजल कुमार जी
    ब्लाग पर आकर मेरा उत्साह बढाने के लिए सादर धन्यवाद

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  28. तरसता है क्यों "दीपक" ज्योति के लिए
    कब तक रहेगी दूर वो है परछाई मेरी

    बहुत गहन भाव की अभिव्यक्ति आपका आभार

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  29. neend se ho gai kudmaai meri.....waah!!

    waise neend to bahana hai...kudmaai to neend me aane sapne me hui thi.............

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  30. "बातो ही बातो में जब बात आयी तेरी
    यादों से तेरी महकी यार तन्हाई मेरीबहुत रुमानी ख्याल हैं बबुआ:))"


    शानदार गज़ल, बहुत खूबसूरत।

    वैसे ज्योति का वजूद दीपक से होता है, इसलिये रोशन रहो। शुभकामनायें।

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  31. बेशक हो दूर मुझसे पर दूर नहीं लगते
    मेरे दिल में देती है धड़कन सुनायी तेरी...
    प्यार का असर हो रहा है ... कमाल का लिखा है ...

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  32. आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा. हिंदी लेखन को बढ़ावा देने के लिए आपका आभार. आपका ब्लॉग दिनोदिन उन्नति की ओर अग्रसर हो, आपकी लेखन विधा प्रशंसनीय है. आप हमारे ब्लॉग पर भी अवश्य पधारें, यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो "अनुसरण कर्ता" बनकर हमारा उत्साहवर्धन अवश्य करें. साथ ही अपने अमूल्य सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ, ताकि इस मंच को हम नयी दिशा दे सकें. धन्यवाद . आपकी प्रतीक्षा में ....
    भारतीय ब्लॉग लेखक मंच
    डंके की चोट पर

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