Friday, April 8, 2011

अन्ना हजारे

भगीरथ ने की थी तपस्या
संभव करने असंभव  को
उनके  पुरखो की
अतृप्त आत्माओ की 
 प्यास बुझाने
उतर आना पड़ा था
गंगा को
झुक जाना पड़ा था भगवान्  को


एक और भगीरथ
लगा है  तपस्या में
लाना चाहता है लोकपाल की गंगा
करोडो अतृप्त भारतीयों के लिए
जिनकी आत्मा तड़प रही है
भ्रष्टाचार के प्रहार सहते

हमारे  कंठ सूख रहे हैं
भ्रष्टाचारी   मजे लूट रहे है
खुले सांड से घूम रहे है
आखिर कब तक ?
अब तो गंगा को आना ही पड़ेगा 
तृप्त करने करोडो आत्माओ को
सरकार चाहे जितने जोर लगा ले
इन्द्र की तरह
चाहे जितने कोप बरसा ले
ये भगीरथ नहीं हटेगा
ला कर ही रहेगा गंगा को

29 comments:

  1. हमारे कंठ सूख रहे हैं
    भ्रष्टाचारी मजे लूट रहे है
    खुले सांड से घूम रहे है
    आखिर कब तक ?
    बहुत अच्छी रचना

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  2. हाँ ! मै मन हूँ,
    हजारे का |
    बस इतना ही,
    तो चाहा मैंने,
    कि लोकतंत्र में,
    हो विश्वास,
    लोक का तंत्र में |
    हो एहसास,
    भरोसे का,

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  3. तारीफ के लिए हर शब्द छोटा है दीपक भाई - बेमिशाल प्रस्तुति - आभार.

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  4. सच कहा है इस बार गगां को आना ही पड़ेगा लोगो की प्यास बुझाने।

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  5. खूबसूरत आशावादिता का एहसास देती पंक्तियाँ। मिशन की कामयाबी की कामना करते हैं।

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  6. अन्ना ही जीतेंगे ...शुभकामनायें !!

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  7. लगता है ये गंगा भी शीघ्र अवतरित होने ही वाली है...

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  8. उनका भागीरत प्रयास सफल हुआ !

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  9. इन्द्र की तरह
    चाहे जितने कोप बरसा ले
    ये भगीरथ नहीं हटेगा
    ला कर ही रहेगा गंगा को
    lajwab likhne ka andaj

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  10. सुन्दर प्रतीक। भागीरथ की सफलता से पहले 60,000 पुरखे क्रोधाग्नि में भस्म हो चुके थे। मृत्यु आई पर संकल्प नहीं टूटा - काम तो होना ही था।

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  11. बेहद खूबसूरत प्रस्तुति.

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  12. अन्ना जीत गए| उनका भागीरत प्रयास सफल हुआ|

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  13. उनका भागीरत प्रयास सफल हुआ.

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  14. jee han ...aa hi gayi ganga ....safal hua prayas ...sunder rachna ke liye badhai

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  15. अन्ना हज़ारे
    एक आह्वान है , एक आन्दोलन है
    उनके द्वारा किये जा रहे इक पावन यज्ञ में
    आपके ये पावन शब्द
    पावन आहुति ही हैं ......
    अभिवादन .

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  16. आपने एक सरल हृदय से कविता कह दी. अच्छी लगी. आंदोलन पर अपनी भावनाओं को व्यक्त करता चलता हूँ.
    तेरा आना भी धोखा था, तेरा जाना भी धोखा है
    मेरा दिल तो न मानेगा, जो इन आँखों ने देखा है

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  17. सही कहा आपने, आज हमें ऐसे सैकड़ों भागीरथों की जरूरत है
    बेहतरीन प्रस्तुति

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  18. हमारे कंठ सूख रहे हैं
    भ्रष्टाचारी मजे लूट रहे है
    खुले सांड से घूम रहे है
    आखिर कब तक ?...

    यथार्थ के धरातल पर रची गयी एक सार्थक प्रस्तुति !

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  19. अन्ना का भागीरथ प्रयत्न और हमारी दुआयें दोनो ही सफ़लकाम हुए ।
    अच्छी प्रस्तुति .....

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  20. अच्छे है आपके विचार, ओरो के ब्लॉग को follow करके या कमेन्ट देकर उनका होसला बढाए ....

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  21. deepak ji
    aapki ham sab ki ichha puri ho hi gai .aaj ke yug me ek aur bhagirath aapni koshish me kamyaab ho gaye .ganga ko punah aana hi pada .
    सरकार चाहे जितने जोर लगा ले
    इन्द्र की तरह
    चाहे जितने कोप बरसा ले
    ये भगीरथ नहीं हटेगा
    ला कर ही रहेगा गंगा को
    bahut abhut shubh kamnayen avam badhai
    dhanyvaad
    poonam

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  22. ये भगीरथ नहीं हटेगा
    ला कर ही रहेगा गंगा को
    wah...kya baat hai.

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  23. बहुत जरुरी हो गया है अब इस curruption को रोकना.इसकी जडें बहुत नीचे तक समा चुकी है.

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  24. atal vishvas jataya hazaro lakho ne ise aastha me...hum sabheeko bhee ye tay karna hai ki apanee suvidhao ko maddenazar rakhte hum kaam karvane hetu kisee kee mutthee garm nahee karenge......niymo par chalenge.......aandolan safal tabhee hoga jab hum bhee imaandaree ko apnaenge.........Pardarshee rahenge ...tax kee choree nahee karenge......

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